Hindi Articals
More English Articals

क्यों चलती है बाबाओं की दुकान? सफल बाबा बनने के गुर

हाल ही में प्रायः सभी टी.वी. चैनलों पर लोगों ने बाबाओं के विरोध में उनके द्वारा समाज में फैलाए जा रहे अंधविश्वास एवं आस्था-श्रद्धा के साथ खिलवाड़ किए जाने का आरोप लगाया। संसद में भी इसके ऊपर सवाल गूंजे, नागपुर में अंधविश्वास उन्मूलन समिति ने जमकर मोर्चे निकाले, नाटक रचे, उसके बावजूद ये बाबा लोग टी.वी. के अनेक चैनलों पर यथावत् अपना खेल मजे़ से खेल रहे हैं। भारत के लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ा, अब तो भीड़ शायद और भी बढ़ जाए क्योंकि भारत सदियों से भाग्यवादी और दूसरों की कृपा पर शार्टकट से जीने वाला देश है। इसमें बाबाओं की कोई गलती नहीं है, ये तो हमारी ही मांगें हैं, हमारे ही डर हैं, हमारी ही कमजोरियाँ है, हमारी ही घोर अज्ञानता है, जो इन बाबाओं को खोजती हैं। आपके अपने कारण ही पैदा होते हैं ये बाबा!

क्यों रेकी कई बीमारियों में बहुत कम लाभ देती है या बिलकुल ही लाभ नहीं देती? - ऐसा नहीं है कि रेकी लाभ नहीं दे पाती या बिलकुल नहीं देती- जैसे कि ऊपर स्पष्ट बताया गया है कि बीज अपनी अंकुरित होने की क्षमता खो चुका है। आप एक बीज लें, जमीन में डालें, हवा-पानी-धूप इत्यादि दें। बीज में चूंकि पूरी सुसुप्त (सोई हुई) क्षमता है; इनके मिलते ही अंकुरित होकर पौधा और वृक्ष बनने की तरफ भाग पड़ता है। उसी बीज को आग पर भून दें; अब उसकी भीतरी सोई हुई क्षमता नष्ट हो जाती है। अब उसको जितनी चाहे हवा, धूप एवं पानी दें, उससे कुछ भी अंकुरित नहीं होता। क्यों ? क्योंकि आग उसके भीतरी सूक्ष्म नवनिर्माण करने वाले प्राण तत्वों को नष्ट कर चुकी है। हवा पानी धूप क्या करेगी, यदि बीज के अन्दर अपनी क्षमता ही नहीं है? इसलिए ऐसी बीमारियों जिसको हमने गलत कारणों से पूरी तरह तोड़ दिया हैं इन बीमारियों में अगर किसी भी कोषाणु में थोड़ी मात्रा में भी अगर नव निर्माण की क्षमता बची है तो रेकी ऊर्जा मिलते ही वह अंग उस क्षमता का प्रदर्शन कर हमें किसी न किसी मात्रा में लाभ अवश्य देगी। इसलिए रेकी बीमारी की चाहे जो अवस्था हो लाभ अवश्य देती है। यहाँ तक कि मरते हुए आदमी को भी चार सांसे राहत की देती है

क्या है बाबाओं की सफलता का राज़- हर व्यक्ति में एक स्वाभाविक अन्तःप्रेरणा होती है जिस Intuitio n पवद कहा जाता है। ब्रह्माण्ड में

हर व्यक्ति एवं वस्तु की तरंगें सूक्ष्म जगत में तरंगित हो रही होती हैं। जैसे ही आप किसी भी व्यक्ति को देखते हैं या उसका विचार करते हैं तो आपको उससे संबंधित अनेक प्रकार की तरंगों का आभास होने लगता है और वह आभास उसके भूत, भविष्य या वर्तमान, किसी भी समय से जुड़ा हो सकता है। सूक्ष्म जगत में समय और दूरी का कोई अर्थ नहीं रह जाता। इसलिए उसके बारे में सोचते ही उससे संबंध्ति तरंगों ;थ्तमुनमदबलद्ध से हमारा संबंध जुड़ जाता है और वह हमें विचार, भाव या दृश्य के रूप में अपने भीतर महसूस होने लगते हैं और यह स्वाभाविक क्षमता हर सामान्य से सामान्य व्यक्ति में होती है, चाहे वह छोटा हो, बड़ा हो, अनपढ हो, स्त्री हो या पुरूष। हाँ, यह मात्रा किसी में कम, किसी में ज्यादा होती है। कई लोगों में यह अति संवेदनशीलता बचपन से ही जन्मजात होती है। (पूर्वजन्म में ध्यान, भक्ति, पूजापाठ या किसी विशेष तपस्याओं के कारण) और कई लोगों को इसे विकसित करना पड़ता है- शांत होकर संवेदनशीलता को बढ़ाने के लिए विशेष तरीकों से - जोकि हर सामान्य व्यक्ति कर सकता है। ये तरीके हमारे रेकी क्लास, डाउजि़ंग विज्ञान, क्रिस्टल बाॅल गेजि़ंग जैसे कोर्सों में सिखाए जाते हैं। 80 फीसदी लोगों में स्वाभाविक अंतःप्रेरणा होती है, 20 फीसदी लोगों को विकसित करनी पड़ती है। रेकी, ध्यान, मंत्र, भक्ति, संगीत, कलाओं की साधना करने वालों मे तो ये स्वाभाविक रूप से विकसित होती ही है बस हम उस पर गौर नहीं करते। तो इन बाबाओं के पास भी यही अंतःप्रेरणा की स्वभाविक क्षमता है जिसका ये बड़ी चालाकी से उपयोग कर रहे हैं, परंतु इनका कार्यक्रम देखने के बाद ये तो शत्-प्रतिशत् सिद्ध हो जाता है कि उनके पूरे कार्यक्रम में 10 फीसदी तो अंतःप्रेरणा का हाथ होता है और 90 फीसदी चालाकी (अवचेतन मन) का खेल है। क्योंकि हमारा अवचेतन मन पूरी तरह विश्वास के आधार पर ही काम करता है तर्क के आधार पर नहीं।

            सब कुछ अवचेतन मन के खेल-रेकी ग्रेंड मास्टर में सिखाए जाते हैं ये सभी रहस्य - कैसे चलते हैं यंत्र, तंत्र, मंत्र और इन बाबाओं के खेल-ये सभी हमारे रेकी ग्रेंड मास्टर कोर्स में रहस्य खोले जाते हैं, हमारे सैकड़ों रेकी ग्रेंड मास्टर अच्छी तरह जानते हैं कि इन सबके पीछे किसकी कृपा काम कर रही है। हमारी प्रथम, द्वितीय डिग्री में यह अच्छी तरह बता दिया गया था कि ईश्वर कानून बनाकर स्थाई रूप से सो गया है। वह कुछ नहीं करता, अब जो कुछ भी घटता है इस संसार में वह सब ब्रह्माण्ड के अटल अचूक नियमों के अंतर्गत घटता है। ब्रह्माण्ड में आकर्षण के नियम काम कर रहे हैं। आप जिस विश्वास में हर पल तरंगित होते हैं, वही आप अपने चारों तरफ से ब्रह्माण्ड से आकर्षित करने लग जाते हैं- चाहे वह नकारात्मक हो या सकारात्मक।

            किसी बाबा में कोई शक्ति नहीं, कोई चमत्कार नहीं- बाबाओं की सबसे ज्यादा शक्तियाँ और चमत्कार भारत में ही गिनवाये जाते हैं। लेकिन मजेदार बात यह है कि इनकी इतनी शक्तियों और चमत्कारों के बावजूद भारत विश्व में सैकड़ों सालों से गुलाम रहे देशों में तीसरा देश कहलाता है। गरीबी, गंदगी, अनुशासनहीनता, लालच, भ्रष्टाचार, अंधभक्ति जैसे समस्याओं से आज भी जूझ रहा है किन्तु ये बाबा आज तक देश का कल्याण नहीं कर पाए।

            ‘कहाँ है हमारे ऋषि-मुनियों की शक्तियाँ?’ एवं ‘रेकी के सहारे बन गए अनेक ढ़ोंगी महात्मा’ - पढ़ें इस लेख को, हमारी पुस्तक ‘आध्यात्मिक पाखंड’ में या हमारी वेबसाईट;( www.reikihealingfoundation.net) पर हिन्दी के लेखों में और जानिए सच्चाई को! इन सभी बाबाओं में एक ही सबसे बड़ी अद्भुत शक्ति है वह है चालाकी और नाटकबाजी से भीड़ की कमजोरियों का उपयोग करने की कला! अभी हाल ही में इन बाबाओं पर जो मुसीबतों के पहाड़ टूटें उनसे इनकी अन्तःप्रेरणा, तीसरी आँख अपने खुद के लिए ही बंद हो गई।ये स्वयं आश्चर्य चकित हो गए कि ये उनके साथ क्या हो गया?

            शक्ति तो आप में है, चमत्कार तो आप में है। किस कृपा की मांग कर रहे हैं आप? आप अपने आप पर कृपा करें। अपनी आंतरिक शक्तियों की पहचान करें। ईश्वर-प्रदत्त इन अद्भुत चमत्कारी दिव्य शक्तियों को पहचानें। ब्रह्माण्ड के अचूक नियमों की पहचान करें। ईश्वर ने आपके भीतर कोई कमी नहीं रखी है। आप अज्ञानता, बेबसी एवं भय में जी रहे हैं और भाग रहे हैं बाबाओं, ज्योतिषियों, तांत्रिकों या अन्य पाखंडी गुरूओं के पीछे। रूकिए! रेकी हीलिंग फाउन्डेशन के कोर्स के सम्पर्क में आइए आपकी आँखें हमेशा के लिए खुल जाएँगी। ये फालतू, बेवजह की भागदौड़ हमेशा के लिए बंद हो जाएगी और आप बन जाएँगें आप अपने ही गुरू, आपके अपने ही जीवन के मालिक, अपने भाग्य, इच्छाओं, सपनों के मालिक। आप स्वयं बन सकेंगे सबके लिए प्रेरणा।

            कैसे काम करती है बाबाओं की तकनीक- हमारे रेकी कोर्स में इस बात की पूरी समझ दी जाती है कि मानव का सम्पूर्ण जीवन हर पल अवचेतन मन से संचालित होता है जो इस अवचेतन मन के कार्य को समझ लेता है, वह चाहे तो अपनी इच्छानुसार इससे काम करवा सकता है, इसका मालिक बन सकता है। जो अवचेतन मन को जीत सकता है, वह संसार को जीत सकता है। इतना अद्भुत, इतना शक्तिशाली है हमारा अवचेतन मन! (इसके बारे में विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें हमारी पुस्तक ‘अवचेतन मन की चमत्कारी शक्तियाँ’ या जोसेफ मर्फी की अंग्रेजी पुस्तक ‘दि पाॅवर आॅफ सबकाॅन्शीयस माइंड’ ये पुस्तकें त्भ्थ् केन्द्र पर उपलब्ध हैं।)

            हमारा अवचेतन मन हमारे विश्वास पर कार्य करता है, तर्क पर बिलकुल नहीं। इसलिए आप किसी भी बाबा, पाखंडी गुरू या सच्चे गुरू के पास भी चले जाएँ या आप किसी भी मंदिर, गुरूद्वारे, मज़ार पर चले जाएँ, आपका विश्वास कमजोर है या दृढ़, आपका इनके पास जाना ही आपके अवचेतन मन को निश्चित रूप से प्रभावित करता है।

            अब ये आपको जो चाहे ऊलजलूल, अटपटा, अतार्किक ;प्ससवहपबंसद्ध, मूर्खताभरा मार्गदर्शन दे दें-आप पर यह काम करेगा ही, क्योंकि हरेक स्वीकृत उपाय (क्रिया) आपके अवचेतन मन को हर हाल में प्रभावित करेगा ही। इस तरह के उपायों का मैंने भी हजारों लोगों पर प्रयोग किया है और इससे उनके काम सचमुच बन गए। हमारे लेखों का मकसद अपनी तारीफों के पुल बांधना नहीं है बल्कि एक सच्चाई सामने लाना है। मैंने कई लोगों को अटपटे मंत्र दिए हैं और उनको लाभ पहुँचाया है (जो आप क्लास में सुन चुके हैं) कई लोगों को बेतुके सामान देकर उनका काम सफल कर दिया है। इसी अवचेतन मन के कारण ये बाबा ‘कृपा’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। आप एक समस्या लेकर जाएँ और अगर आपको वो बात कही जाए जो आप नहीं कर रहे हैं और आपको नया कुछ करने के लिए कह दिया जाए तो बस समझ लें हो गई अवचेतन मन की प्रोग्रामिंग। उदाहरण के लिए अगर मैं कहूँ कि आज के बाद तुम अपना बांया पांव ही जमीन पर रखकर उठना तो तुम्हारा काम हो जाएगा तो अब तुम 24 घंटे इस नए शब्द के साथ जुड़कर अपने अवचेतन मन को विश्वास दिला दोगे कि ऐसा करने से मेरा काम हो जाएगा। अवचेतन मन आपके पक्के विश्वास को शत् प्रतिशत फलीभूत करेगा ही। यह उसका नियम है। अब मैं आपसे जो चाहे कह दूँ कि रोटी सब्जी के साथ न खाकर सिर्फ हरी चटनी से ही खानी है या लाल रंग का ही पेन रखकर हस्ताक्षर करें या बटुआ कत्थई रंग का ही रखें या फलाने मंदिर में जाकर ये धागा बांधकर आएँ, ऐसे हजारों अटपटे मार्ग दर्शन दूँ तो ये सभी कार्य करेंगें। परन्तु उसके लिए ये भी विश्वास लोगों में पैदा करना जरूरी है कि आप एक शक्तिशाली या प्रसिद्ध व्यक्ति हैं, जब तक सामने वाले के भीतर आपके बारे में चमत्कारिक कहानियों की सूचना नहीं होगी आप तुरन्त उन पर पूरा विश्वास भी नहीं कर पाएँगें।

            आखिर कब तक जारी रखोगे इस अंधविश्वास का पोषण, कब तक भरते रहोगे इन पाखंडी, ढोंगी बाबाओं के बैंक बैलेंस को, कब तक दोष मढ़ते रहोगे ईश्वर पर और ईश्वर को समझते रहोगे एक बददिमाग वाला, अहंकारी, मूडी, सनकी और क्रूर व्यक्तित्व जो जेब में काला पर्स न रखने से ‘कृपा’ को तुरंत रोक लेता है या समोसे में लाल चटनी के बजाय हरी चटनी खा लेने से तुम्हारे काम बिगाड़ देता है या कोलगेट का टूथपेस्ट करने से धंधे में चार चांद लगा देता है या लक्स अंडरवियर-बनियान पहनने से इंटरव्यू में आपको सफल कर देता है इत्यादि-इत्यादि। मिट्टी पलीद करके रख दी इन बाबाओं ने बेचारे ईश्वर की और मजेदार बात तो ये है कि लोग अब परमात्मा की जय नहीं बोलते बल्कि बाबा की जय बोलते हैं। परमात्मा की उन्हें अब जरूरत नहीं उन्हें तो बाबा की ‘कृपा’ चाहिए क्योंकि बाबा ईश्वर का असली दलाल है। दलाल सिफारिश कर देगा तो परमात्मा आँख बंद कर उसकी बात मान कर आपका काम कर देगा। ऐसे कुछ बाबा और पैदा हो जाएँ तो शायद आदमी को ईश्वर की जरूरत ही न रहे। वैसे भी किसको पड़ी है ईश्वर की? जो आपका काम निकाल दे, वही आपका भगवान है। जय बाबा की!

(Dr. Savita Sharma)

 

Untitled Document
Main Menu Hide Menu Show Menu Back to top
Loading