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क्या रेकी उपचार की सीमाएँ हैं?

क्या रेकी उपचार की सीमाएँ हैं? - जी नहीं! रेकी उपचार की किसी भी तरह की सीमाएँ नहीं हैं। सीमाएँ हमारी हैं, चूंकि रेकी एक सर्वव्यापक ब्रह्मांडीय ऊर्जा है, जैसे हवा, पानी, धरती, आकाश, सूर्य आदि। ये तो आपको ऊर्जा से भर देना चाहते हैं लेकिन हमारी अपनी स्वनिर्मित सीमाएँ, बाधाएँ, अवरोध आदि इन दिव्य ऊर्जाओं को सीमित कर देती हैं। हवाएँ, जल एवं प्रकाश तो बीज को पूर्ण अंकुरित होकर खिलने के लिए पूरा सहयोग करते हैं परन्तु बीज की अपनी अनुवांशिक क्षमता और क्वालिटी उसको पूर्ण या सीमित खिलने देती है।

क्यों रेकी कई बीमारियों में बहुत कम लाभ देती है या बिलकुल ही लाभ नहीं देती? - ऐसा नहीं है कि रेकी लाभ नहीं दे पाती या बिलकुल नहीं देती- जैसे कि ऊपर स्पष्ट बताया गया है कि बीज अपनी अंकुरित होने की क्षमता खो चुका है। आप एक बीज लें, जमीन में डालें, हवा-पानी-धूप इत्यादि दें। बीज में चूंकि पूरी सुसुप्त (सोई हुई) क्षमता है; इनके मिलते ही अंकुरित होकर पौधा और वृक्ष बनने की तरफ भाग पड़ता है। उसी बीज को आग पर भून दें; अब उसकी भीतरी सोई हुई क्षमता नष्ट हो जाती है। अब उसको जितनी चाहे हवा, धूप एवं पानी दें, उससे कुछ भी अंकुरित नहीं होता। क्यों ? क्योंकि आग उसके भीतरी सूक्ष्म नवनिर्माण करने वाले प्राण तत्वों को नष्ट कर चुकी है। हवा पानी धूप क्या करेगी, यदि बीज के अन्दर अपनी क्षमता ही नहीं है? इसलिए ऐसी बीमारियों जिसको हमने गलत कारणों से पूरी तरह तोड़ दिया हैं इन बीमारियों में अगर किसी भी कोषाणु में थोड़ी मात्रा में भी अगर नव निर्माण की क्षमता बची है तो रेकी ऊर्जा मिलते ही वह अंग उस क्षमता का प्रदर्शन कर हमें किसी न किसी मात्रा में लाभ अवश्य देगी। इसलिए रेकी बीमारी की चाहे जो अवस्था हो लाभ अवश्य देती है। यहाँ तक कि मरते हुए आदमी को भी चार सांसे राहत की देती है

कई बीमारियों में रेकी का लाभ नजर नहीं आता जैसे लकवा, किडनी फेल्योर, कैंसर एवं कुछ असाध्य रोगों में ?- रेकी ऊर्जा कभी फेल नहीं होती, इन बीमारियों में अधिकतर जो मरीज बहुत दूर तक जा चुके हैं, स्वास्थ्य की तरफ लौट नहीं सकते क्योंकि उन मरीजों को शरीर की बची खुची नवनिर्माण की क्षमता के अनुसार आंशिक लाभ अवश्य मिलता है जैसे नींद आना, भयंकर दर्द से राहत, लक्षणों में कमी, क्षतिग्रस्त अंगों में थोड़ी बहुतहरकत इत्यादि जिन बीमारियों में बिलकुल भी कोई संभावना नहीं है।

ऐसी भी बीमारियों में रेकी ने बहुत आश्चर्यजनक प्रगति दिखाई है जैसे मस्क्यूलर डिस्ट्रोर्फी, सेरेब्रल पाल्सी, स्पास्टीक बच्चे, मेंटली रिटायर्ड बच्चे (मंदबुद्धि बच्चे), पार्किन्सन, कोमा, लकवा, मल्टीपल स्केलरोसिस इत्यादि। मैंने अपने रेकी क्षेत्र में 20 साल के अनुभव में रेकी को कभी असफल होते नहीं देखा। किसी न किसी रूप में रेकी ने राहत या लाभ अवश्य दिया है, अगर किसी ने रेकी का नियमित पूरी ईमानदारी से आवश्यकतानुसार उपयोग किया है।

क्यों जीवन की व्यावसायिक, पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक, वैश्विक, कानूनी आदि जैसी अनेक समस्याओं में बहुत दूर उपचार के बावजूद भी कोई परिणाम नहीं आया? - सही है! उपरोक्त ऐसी अनेक समस्याओं में हमें सकारात्मक, मनचाहे परिणाम नहीं मिलते। रेकी में हमने इस सच को जाना था कि इस संसार में सब कुछ नियमों के अन्तर्गत चलता है और ये भी एक नियम है कि हर नकारात्मक ऊर्जा के सामने उसकी विपरीत सकारात्मक ऊर्जा उसी मात्रा में निर्मित करनी पड़ती है। जितनी मात्रा में सामने नकारात्मक ऊर्जा है। बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का प्रमाण नकारात्मक ऊर्जा के मुकाबले ज्यादा प्रबल होनी चाहिए, कमजोर नहीं। इस नियम को भी दिमाग में स्पष्ट रखना चाहिए कि कोई भी पैदा की गई ऊर्जा कभी व्यर्थ नहीं जाती, नष्ट नहीं होती। अब हम यह समझेंगें कि क्यों हम अनेक समस्याओं में असफल हो जाते हैं। इसके कुछ कारण निम्नलिखित हैंः-

  1. जिस परिमाण में नकारात्मक ऊर्जा थी उस परिमाण में आपने प्रबल सकारात्मक ऊर्जा निर्मित नहीं की। गम्भीर रोग और समस्याओं में हमेशा एक शक्तिशाली ग्रुप (सामूहिक) रेकी की आवश्यकता होती है, जिसकी हम व्यवस्था नहीं कर पाते हैं।
  2. जो समस्याएँ बहुत गहरी भावनाओं एवं संस्कारों से जुड़ी होती हैं उसके लिए हमारी भी भावनाएँ उतनी गहरी होनी चाहिए। जैसे प्रेम-प्रसंग में युवा-युवती पूरी तरह भावनाओं के साथ जुड़ जाते हैं। अब अगर कोई कहे कि इनके प्रेम संबंध समाप्त कर दो तो आसान नहीं है। आपको कई महीनों तक उनकी मजबूत भावनाओं की दीवारों को ऊर्जा का हथोड़ा मार-मारकर कमजोर करना पड़ेगा और इसमें लंबे समय तक उपचार करने के बाद ही कुछ परिणाम आता है। वैसे भी रेकी में हम हमेशा अपने और दूसरों के सर्वोच्च हित के लिए ही कार्य करते हैं।
  3. बचपन से ही जड़ हो गए नकारात्मक स्वभाव, मान्यताओं में भी बहुत लम्बे समय तक रेकी की आवश्यकता होती है। निरंतर उपचार का प्रयास अंत में सकारात्मक परिणाम अवश्य लाता है।
  4. जिस समस्या में पूर्वजन्म से कार्मिक संबंध का जुड़ाव है उस कर्म बंधन को सकारात्मक रूप देने में भी बहुत लंबे उपचार की आवश्यकता होती है। रेकी के माध्यम से पूर्वजन्म के बंधन काटकर भविष्य की एक नई ऊर्जा रचकर हम भविष्य को सुखद कर सकते हैं।
  5. जो समस्या सम्पूर्ण परिवार, समूह, समाज, सरकार, संवैधनिक नियमों से जुड़ी है, उसमें एक अकेले व्यक्ति की रेकी शक्ति कभी काम नहीं कर सकती। ऐसी सामूहिक समस्याओं के लिए हजारों-लाखों लोगों की रेकी ऊर्जा का फोर्स चाहिए अन्यथा हमारी ऊर्जा समूह की प्रबल ऊर्जा के सामने छोटी पड़ने के कारण असफल हो सकती है। इसमें कोई शक नहीं कि हमारी प्रबल भावनात्मक रेकी ऊर्जा का फोर्स किसी न किसी आंशिक रूप में बहुत थोड़ा ही सही, छोटा ही सही पर सकारात्मक परिणाम अवश्य लेकर आता है अथवा नकारात्मक ऊर्जा के दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम अवश्य कर सकता है। यह अटूट श्रद्धा हमेशा अवश्य रखें कि दिल से की गई रेकी कभी असफल नहीं होती। वह कुछ न कुछ सकारात्मक परिणाम अवश्य लाती है।
  6. जो आदमी शराब, सिगरेट, खानपान, व्यसनों की गहराइयों में डूबकर स्वयं ही उसको छोड़ना नही चाहता, उसका उपचार करना कठिन है। प्रयास अवश्य करें क्योंकि व्यसनी व्यक्ति के पास व्यसन के पक्ष में गहरा विश्वास है, वह उसे पसंद करता है, उस विश्वास और आकर्षण को तोड़ने में हमें काफी लंबे समय तक रेकी करनी पड़ सकती है या ग्रुप रेकी की भी आवश्यकता पड़ सकती है। रेकी में ‘असंभव’ जैसा शब्द नहीं है। किसी भी चीज को संभव करने के लिए जितनी प्रबल ऊर्जा की आवश्यकता है उस ऊर्जा के निर्माण में लंबा समय लग सकता है। जिसके लिए अक्सर हम कमजोर पड़ जाते हैं या निराश हो जाते हैं।
  7. जो आदमी शराब, सिगरेट, खानपान, व्यसनों की गहराइयों में डूबकर स्वयं ही उसको छोड़ना नही चाहता, उसका उपचार करना कठिन है। प्रयास अवश्य करें क्योंकि व्यसनी व्यक्ति के पास व्यसन के पक्ष में गहरा विश्वास है, वह उसे पसंद करता है, उस विश्वास और आकर्षण को तोड़ने में हमें काफी लंबे समय तक रेकी करनी पड़ सकती है या ग्रुप रेकी की भी आवश्यकता पड़ सकती है। रेकी में ‘असंभव’ जैसा शब्द नहीं है। किसी भी चीज को संभव करने के लिए जितनी प्रबल ऊर्जा की आवश्यकता है उस ऊर्जा के निर्माण में लंबा समय लग सकता है। जिसके लिए अक्सर हम कमजोर पड़ जाते हैं या निराश हो जाते हैं।
  8. जो रेकी संदेह, अविश्वास, भय, निराशा, निरूत्साह आदि भाव से दी जाती है वह रेकी केवल कर्मकांड रह जाती है उसमें कोई प्रबल ऊर्जा निर्मित न होने के कारण वह असफल हो सकती है। उसमें दोष रेकी का नहीं है, आपके अपने ही विश्वास का है।
  9. जिन रोगों में सर्जरी या एक्सीडेंट के कारण शरीर का कोई अंग क्षतिग्रस्त हो जाता है या हड्डियों में जुड़ाव होने के लिए आवश्यक नजदीकियाँ नहीं होती, ऐसे हालात में ऊर्जा के प्रवाह में गतिरोध् या सम्पर्क न होने के कारण रेकी पूरी तरह कारगर नहीं होती सिर्फ कुछ प्रतिशत राहत दे सकती है।
  10. यदि रोग या समस्याओं में मूल कारणों को जानकर उनको ठीक नहीं किया जाता या आवश्यक सकारात्मक कारणों को जुटाया नहीं जाता, उसमें भी रेकी का परिणाम नजर नहीं आता या कम आता है। जैसे कोई रोगी स्वस्थ होना चाहता है और वह रोग संबंध्ी मूल कारणों ;आहार-विहार, आचार-विचार एवं गलत आदतें, व्यसन, पूर्वजन्मों के कार्मिक बन्ध्न, वास्तुदोष, दवाएँ, केमिकल्स, अनुवांशिक या वातावरणद्ध को साथ में रखता है ऐसे रोगियों पर रेकी असफल रहती है या कम लाभ देती है। अगर आप कोई संबंध् मध्ुर करना चाहते हैं तो आपको संबंध् बिगाड़ने वाले कारणों से अपने आपको मुक्त करना पड़ेगा तभी रेकी का निश्चित प्रभाव महसूस होगा।
    रेकी हीलिंग फाउन्डेशन के सभी कोर्सों में रोग एवं समस्याओं के मूल कारणों को ठीक करने पर ज़ोर दिया जाता है। इसीलिए विश्वभर में सबसे ज्यादा सफल परिणाम त्भ्थ् चेनल्स के पास हैं!

(Dr. Savita Sharma)

 

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